जब कुछ समझ न आए, तब एक ही मंत्र याद रखो: लगातार मेहनत करते रहो... By Rupesh Ranjan
जब कुछ समझ न आए, तब एक ही मंत्र याद रखो: लगातार मेहनत करते रहो
Rupesh Ranjan
जीवन में ऐसे दौर हर किसी के जीवन में आते हैं जब सब कुछ धुंधला लगने लगता है।
लक्ष्य तो होता है, लेकिन वहाँ तक पहुँचने का रास्ता साफ़ नहीं दिखता। मन में सैकड़ों सवाल होते हैं। भविष्य की चिंता सताती है। तनाव बढ़ने लगता है। हम हर चीज़ का जवाब ढूँढ़ने लगते हैं—क्या करना चाहिए, कैसे करना चाहिए, सही रास्ता कौन सा है, अगला कदम क्या होना चाहिए।
लेकिन ऐसे समय में एक बहुत सरल मंत्र है, जो शायद जीवन का सबसे बड़ा तावीज़ (Talisman) है:
"चुपचाप लगातार मेहनत करते रहो।"
हाँ, इतना ही।
जब कुछ समझ न आए, तब भी काम करते रहो।
जब रास्ता न दिखे, तब भी काम करते रहो।
जब मन में डर और तनाव हो, तब भी काम करते रहो।
अक्सर हम सोचते हैं कि आगे बढ़ने के लिए पहले पूरी स्पष्टता चाहिए। हमें लगता है कि जब सब कुछ समझ आ जाएगा, तब हम पूरी ताकत से काम करेंगे।
लेकिन सच्चाई इसके ठीक उलट है।
स्पष्टता काम करने से आती है, सोचते रहने से नहीं।
ज्यादातर लोग इसलिए नहीं रुकते क्योंकि उनके पास क्षमता नहीं होती। वे इसलिए रुक जाते हैं क्योंकि वे हर चीज़ को समझ लेने का इंतज़ार करते रहते हैं। वे हर संभावना का विश्लेषण करते हैं, हर जोखिम के बारे में सोचते हैं, हर निर्णय को लेकर उलझे रहते हैं।
धीरे-धीरे उनका ध्यान काम से हटकर चिंता पर केंद्रित हो जाता है।
जबकि जीवन का नियम बहुत सरल है—
जो चलता रहता है, वही आगे बढ़ता है।
यदि आप किसी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, तो पढ़ते रहिए।
यदि आप कोई व्यवसाय खड़ा कर रहे हैं, तो काम करते रहिए।
यदि आप कोई नई कला सीख रहे हैं, तो अभ्यास करते रहिए।
यदि आप अपने किसी सपने के पीछे दौड़ रहे हैं, तो रोज़ थोड़ा-थोड़ा आगे बढ़ते रहिए।
हर दिन का प्रयास आपको केवल लक्ष्य के करीब नहीं ले जाता, बल्कि आपको उस व्यक्ति में बदलता है जो उस लक्ष्य के योग्य है।
कुछ दिन ऐसे आएँगे जब लगेगा कि कोई प्रगति नहीं हो रही।
कुछ दिन ऐसे होंगे जब लगेगा कि सारी मेहनत बेकार जा रही है।
कुछ दिन ऐसे भी होंगे जब लगेगा कि बाकी सब लोग आगे निकल गए हैं और आप वहीं के वहीं हैं।
लेकिन यही वे दिन होते हैं जब हार मानने और आगे बढ़ते रहने के बीच का निर्णय आपके भविष्य को तय करता है।
कई बार साहस का मतलब कोई बड़ा जोखिम उठाना नहीं होता।
कई बार साहस का मतलब सिर्फ इतना होता है कि आप आज भी अपना काम करें, चाहे मन कितना भी उलझा हुआ क्यों न हो।
आपको आज अपने पूरे भविष्य का समाधान नहीं चाहिए।
आपको हर सवाल का जवाब नहीं चाहिए।
आपको पूरा रास्ता देखने की आवश्यकता नहीं है।
आपको बस अगला कदम उठाना है।
फिर उसके बाद वाला कदम।
और फिर उसके बाद वाला।
धीरे-धीरे तनाव कम होने लगता है। रास्ते साफ़ होने लगते हैं। आत्मविश्वास बढ़ने लगता है। और एक दिन पीछे मुड़कर देखने पर पता चलता है कि आपको आगे किसी जादू ने नहीं बढ़ाया था।
आपको आगे बढ़ाया था आपकी निरंतरता ने।
इसलिए जब भी जीवन में कुछ समझ न आए, जब तनाव बहुत बढ़ जाए, जब रास्ता धुंधला लगे, तब इस तावीज़ को याद रखिए—
"ज़्यादा मत सोचो। चुपचाप लगातार मेहनत करते रहो। कई बार रास्ते उन्हें दिखाई देते हैं जो चलते रहते हैं।"
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