लड़की का बढ़ना आज भी देखा नहीं जाता....

 लड़की का बढ़ना आज भी देखा नहीं जाता,

उसका ऊँचा उठना समाज से सहा नहीं जाता।


उन्हें चाहिए एक खामोश, दबी हुई कहानी,

जो न पूछे सवाल, न लिखे अपनी ज़ुबानी।


पर अब वक़्त ने करवट बदल ली है,

हर बेड़ी ने अपनी जकड़न छोड़ दी है।


जो कभी चौखटों तक सीमित रखी गई थी,

वही आज आकाश की दिशा लिख रही है।


उसकी उड़ान से जिन्हें परेशानी होती है,

असल में उनकी सोच ही बौनी होती है।


नारी अब अनुमति नहीं, अधिकार माँगती है,

और नया युग उसके साहस से पहचान पाता है।


Rupesh Ranjan



आदत बदल लीजिए, समय बदल रहा है,

हर बंद दरवाज़ा अब स्वयं खुल रहा है।


अब हर सवाल का जवाब मिलेगा,

अन्याय का हर हिसाब मिलेगा।


जो नारी सदियों तक दबाई गई थी,

वही आज अपनी पहचान गढ़ रही है।


उसकी खामोशी को कमजोरी मत समझिए,

अब वह अपने अधिकारों की भाषा समझती है।


अपने फैसले अब वह खुद करेगी,

अपनी मंज़िल का रास्ता खुद चुनेगी।


युग नया है, सोच को भी नया कर लीजिए,

नारी जाग चुकी है, यह सच स्वीकार कीजिए।



Rupesh Ranjan



आदत बदल लीजिए, दौर नया आने लगा है,

नारी का आत्मविश्वास अब चमक दिखाने लगा है।


जो कल तक चुप थी, अब मुखर हो रही है,

अपने अधिकारों की राह पर निडर हो रही है।


अब हर निर्णय पर पहरा नहीं चलेगा,

उसके सपनों का सौदा नहीं चलेगा।


वह किसी की स्वीकृति की प्रतीक्षा में नहीं,

अपने सामर्थ्य की परिभाषा लिख रही है यहीं।


उसके पंखों को बाँधने का समय बीत चुका,

पुराना हर अन्यायी नियम रीत चुका।


वह स्वयं अपना भविष्य रचने निकली है,

और इतिहास उसकी दृढ़ता से बदलने निकला है।



Rupesh Ranjan

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