एक दिन मेरी आँखों की रोशनी धीमी पड़ जाएगी, मैं तुम्हें वैसे नहीं देख पाऊँगा जैसे आज देखता हूँ।
एक दिन मेरी आँखों की रोशनी धीमी पड़ जाएगी, मैं तुम्हें वैसे नहीं देख पाऊँगा जैसे आज देखता हूँ।
तुम्हारे चेहरे की हर रेखा, तुम्हारी मुस्कान की हर चमक, तुम्हारी आँखों में छुपे हुए सारे मौसम शायद धुंधले हो जाएँगे।
एक दिन मैं कमज़ोर पड़ जाऊँगा, कदम लड़खड़ाएँगे, हाथ काँपेंगे, और शायद तुम्हारा हाथ उसी मजबूती से थाम भी न पाऊँगा।
एक दिन मेरी आवाज़ भी थक जाएगी, और "मैं तुमसे प्यार करता हूँ" कहने की ताक़त मेरे शब्दों में नहीं बचेगी।
हो सकता है, एक दिन मैं यह दुनिया छोड़कर भी चला जाऊँ।
लेकिन सुनो...
उस दिन भी मेरा प्रेम नहीं जाएगा।
जिस तरह फूल के चले जाने के बाद भी उसकी खुशबू हवा में रहती है, जिस तरह डूबते सूरज के बाद भी आकाश में उसकी लालिमा ठहरी रहती है, उसी तरह मेरी मोहब्बत भी तुम्हारे आसपास कहीं ठहर जाएगी।
जब कभी शाम की हवा तुम्हारे बालों को छुए, समझ लेना मैंने तुम्हें याद किया है।
जब कभी चाँद तुम्हारी खिड़की पर उतर आए, समझ लेना मैं तुम्हें देखने आया हूँ।
जब कभी बिना वजह तुम्हारे होंठों पर मुस्कान आ जाए, समझ लेना मेरी दुआओँ ने तुम्हें छुआ है।
क्योंकि प्रेम शरीर से नहीं, समय से नहीं, उम्र से नहीं, साँसों से भी नहीं बंधता।
प्रेम तो वह एहसास है जो मृत्यु के बाद भी यादों में धड़कता रहता है।
इसलिए यदि कभी मेरी आँखों की रोशनी कम हो जाए, मेरी आवाज़ खो जाए, या मैं इस दुनिया से चला भी जाऊँ,
तो यह मत समझना कि मेरा प्यार भी चला गया।
मैं नहीं रहूँगा, पर तुम्हारे लिए मेरा प्रेम हर सुबह की धूप में, हर रात के चाँद में, हर दुआ और हर ख़ामोशी में हमेशा ज़िंदा रहेगा।
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