एक दिन तुम खुद आओगी मेरे पास...

 

एक दिन तुम खुद आओगी मेरे पास,

खुद ही जताओगी अपना प्यार,
शब्दों की ज़रूरत नहीं होगी,
बस आँखें कह देंगी सब इज़हार।

तब तक शायद तुम थक चुकी होगी,
इस दुनिया के झूठे कायदे-कानून से,
जहाँ रिश्तों को तौला जाता है,
फायदे और नुकसान के माप-दंड से।

तुम हार चुकी होगी उन लड़ाइयों से,
जो तुम खुद से ही लड़ती रही,
जहाँ मुस्कान के पीछे दर्द छुपाकर,
तुम हर दिन जीती और मरती रही।

एक दिन तुम लौटोगी उस सच्चाई में,
जहाँ प्यार किसी शर्त का मोहताज नहीं,
जहाँ दिल सिर्फ दिल से मिलता है,
और कोई हिसाब-किताब नहीं।

शायद तब तुम समझोगी,
कि मैं इंतज़ार नहीं कर रहा था यूँ ही,
मैं हर रोज़ तुम्हें महसूस करता था,
हर सांस में तुम्हें जी रहा था सही।

और जब तुम आओगी,
तो कोई शिकायत नहीं होगी,
बस एक सुकून होगा,
कि अब दूरी की कोई जरूरत नहीं होगी।

तब तुम थक कर नहीं,
बल्कि पूरी होकर आओगी मेरे पास,
और मैं बस इतना कहूँगा—
अब तुम यहीं रहो, यहीं मेरे पास। ❤️

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