जीवन भर विद्यार्थी बने रहिए... By Rupesh Ranjan
जीवन भर विद्यार्थी बने रहिए...
Rupesh Ranjan...
हम अक्सर जीवन को अलग-अलग हिस्सों में बाँटकर देखते हैं।
बचपन पढ़ाई के लिए है।
युवावस्था नौकरी के लिए है।
मध्य आयु परिवार और जिम्मेदारियों के लिए है।
और वृद्धावस्था आराम करने के लिए है।
लेकिन यदि ध्यान से देखा जाए, तो जीवन का सबसे बड़ा उद्देश्य शायद इनमें से कोई भी नहीं है।
शायद जीवन का वास्तविक उद्देश्य है—निरंतर सीखते रहना।
बचपन में जब माता-पिता हमारा साथ देते हैं, तब मन लगाकर पढ़िए। जितना सीख सकते हैं, सीखिए। किताबों से, शिक्षकों से, मित्रों से, अनुभवों से। उस समय आपके पास सीखने का सबसे बड़ा अवसर होता है।
फिर एक समय आता है जब अपने पैरों पर खड़ा होना पड़ता है। नौकरी करनी होती है, व्यवसाय करना होता है, जीवन की जिम्मेदारियाँ उठानी होती हैं। उस समय भी सीखना बंद मत कीजिए।
कमाइए और सीखिए।
क्योंकि दुनिया बदल रही है। नए कौशल आ रहे हैं। नई चुनौतियाँ सामने आ रही हैं। जो सीखना बंद कर देता है, वह धीरे-धीरे समय से पीछे छूटने लगता है।
इसके बाद विवाह होता है। परिवार बनता है। बच्चों की जिम्मेदारियाँ आती हैं। काम का दबाव बढ़ता है। समय कम पड़ने लगता है।
यहीं पर अधिकांश लोग सीखना छोड़ देते हैं।
वे सोचते हैं कि अब पढ़ाई पूरी हो गई।
लेकिन सच्चाई यह है कि पढ़ाई कभी पूरी नहीं होती।
जीवन का हर नया चरण एक नया पाठ लेकर आता है।
पति या पत्नी बनना सीखना पड़ता है।
माता-पिता बनना सीखना पड़ता है।
नेतृत्व करना सीखना पड़ता है।
लोगों को समझना सीखना पड़ता है।
धैर्य रखना सीखना पड़ता है।
हर उम्र का अपना पाठ्यक्रम होता है।
जो व्यक्ति सीखता रहता है, वह उम्र के साथ बूढ़ा नहीं होता; वह उम्र के साथ परिपक्व होता जाता है।
यहाँ "पढ़ाई" का अर्थ केवल किताबें पढ़ना नहीं है।
पढ़ाई का अर्थ है ज्ञान अर्जित करना।
नई भाषा सीखना भी पढ़ाई है।
कोई कौशल सीखना भी पढ़ाई है।
किसी अनुभवी व्यक्ति से सीखना भी पढ़ाई है।
अपने अनुभवों पर विचार करना भी पढ़ाई है।
एक अच्छी बातचीत से मिली समझ भी पढ़ाई है।
जीवन स्वयं एक विश्वविद्यालय है और हर दिन उसकी एक नई कक्षा।
फिर एक दिन सेवानिवृत्ति आती है।
बहुत से लोग इसे जीवन का अंत मान लेते हैं। उन्हें लगता है कि अब करने के लिए कुछ नहीं बचा।
लेकिन शायद यह सीखने का सबसे सुंदर समय होता है।
अब न नौकरी का दबाव है, न करियर की दौड़।
अब आप वह सब सीख सकते हैं जिसके लिए कभी समय नहीं मिला।
इतिहास पढ़ सकते हैं।
दर्शन समझ सकते हैं।
संगीत सीख सकते हैं।
लेखन कर सकते हैं।
नई तकनीक सीख सकते हैं।
अपने अनुभव अगली पीढ़ी को दे सकते हैं।
यही वह समय है जब ज्ञान केवल आपके लिए नहीं रहता; वह समाज की धरोहर बन जाता है।
जीवन की सबसे बड़ी त्रासदी यह नहीं है कि व्यक्ति बूढ़ा हो गया।
सबसे बड़ी त्रासदी यह है कि उसने सीखना छोड़ दिया।
जिस दिन सीखना रुक जाता है, उसी दिन विकास रुक जाता है।
और जिस दिन विकास रुक जाता है, उसी दिन जीवन का उत्साह कम होने लगता है।
इसलिए जीवन को एक लंबी सीखने की यात्रा की तरह देखिए।
बचपन में पढ़िए।
युवावस्था में कमाइए और पढ़िए।
परिवार संभालिए और पढ़िए।
काम कीजिए और पढ़िए।
सेवानिवृत्ति के बाद भी पढ़िए।
क्योंकि डिग्री एक दिन पूरी हो सकती है, लेकिन शिक्षा कभी पूरी नहीं होती।
अंततः एक अच्छे जीवन का सूत्र शायद इतना ही है—
"जीवन भर विद्यार्थी बने रहिए। कमाइए, जिम्मेदारियाँ निभाइए, सफल बनिए, लेकिन सीखना कभी मत छोड़िए।"
क्योंकि जो व्यक्ति सीखना बंद नहीं करता, वह जीना भी बंद नहीं करता।
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