मैं आज भी तुमसे प्रेम करता हूँ...
मैं आज भी तुमसे प्रेम करता हूँ
मैं आज भी तुमसे प्रेम करता हूँ, तुम्हारा सच जानने के बाद भी,
मेरे दिल ने तुम्हें चुना था, हर इल्ज़ाम के बाद भी।
मैं पहले से जानता था कि तुम नदी के हर किनारे से वाक़िफ़ हो,
फिर भी अपने दामन को संभालकर तुम्हारे साथ चलता रहा।
तुम्हारी हर मुस्कान के पीछे कितनी कहानियाँ थीं, मैं समझता था,
फिर भी अपनी मोहब्बत को बेवजह नहीं बदलता था।
मैंने तुम्हें तुम्हारे अतीत सहित स्वीकार किया था,
क्योंकि प्रेम हिसाब नहीं, समर्पण का दूसरा नाम था।
आज सच सामने है, फिर भी दिल में नफ़रत नहीं उगती,
बस एक ख़ामोश टीस है, जो हर धड़कन में सिसकती।
शायद मेरी मोहब्बत ही मेरी सबसे बड़ी ख़ता थी,
कि तुम्हारे बदल जाने के बाद भी, मेरा दिल तुम्हारा ही रहा।
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