अगर वतन से मोहब्बत गुनाह है...
अगर वतन से मोहब्बत गुनाह है
मार दो मुझे, हुक्मरानों,
अगर वतन से मोहब्बत तुम्हें गुनाह लगती है।
अगर सच कहना बगावत है,
तो मेरी हर साँस तुम्हारे इल्ज़ाम की गवाह लगती है।
एक रुपेश के मिट जाने से
क्या ही फ़र्क़ इस दुनिया को पड़ जाएगा,
पर यदि हर सच्ची आवाज़ खामोश कर दी गई,
तो इतिहास तुम्हें कभी माफ़ न कर पाएगा।
मुझे अपने जीवन से अधिक
इस मिट्टी की आन प्यारी है,
मेरे लिए दौलत नहीं,
भारत माँ की मुस्कान सबसे न्यारी है।
मैं तलवार नहीं उठाता,
मैं तो केवल सच की मशाल जलाता हूँ।
जो अँधेरों से समझौता न करे,
मैं वही एक छोटा-सा दीप कहलाता हूँ।
यदि मेरी कलम से डर लगता है,
तो समझ लेना शब्द अभी ज़िंदा हैं।
यदि मेरे विचार चुभते हैं,
तो समझ लेना प्रश्न अभी ज़िंदा हैं।
मुझे किसी सिंहासन की चाह नहीं,
न किसी ताज का अभिमान चाहिए।
बस इतना चाहता हूँ कि
हर नागरिक को सम्मान चाहिए।
मेरा धर्म है भारत,
मेरा कर्म है भारत।
मेरी हर धड़कन कहती है,
सबसे ऊपर मेरा भारत।
यदि मेरे हिस्से में संघर्ष है,
तो मैं उसे मुस्कुराकर स्वीकार करूँगा।
पर अपने देश से प्रेम करना
कभी अपराध नहीं मानूँगा।
जिस दिन इस मिट्टी की रक्षा में
मेरा अंतिम श्वास निकल जाएगा,
उस दिन मेरी चिता का हर कण
तिरंगे को प्रणाम कर जाएगा।
मुझे मृत्यु का भय नहीं,
भय है केवल मौन का।
जब अन्याय सामने खड़ा हो,
तब चुप रह जाने के अपराध का।
मैं नफ़रत का गीत नहीं गाऊँगा,
मैं प्रेम से परिवर्तन लाऊँगा।
जो इस देश को तोड़ना चाहें,
उनके सामने सत्य का दीप जलाऊँगा।
यदि मेरा नाम मिट भी गया,
तो क्या हुआ, विचार अमर रहेंगे।
जो भारत से प्रेम करेंगे,
वे हर युग में सिर ऊँचा कर कहेंगे—
देश से बढ़कर कुछ भी नहीं,
न पद, न यश, न सम्मान।
जिसने भारत को हृदय में रखा,
उसी का जीवन हुआ महान।
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