अब और नहीं झुकेंगे...
अब और नहीं झुकेंगे
अब मौत का डर कैसा,
जब जीना ही इम्तिहान बन गया है।
हर सुबह एक नया संघर्ष,
हर साँस एक एलान बन गया है।
हमारे सपनों पर पहरे बिठाए गए,
हमारी उड़ानों को बाँध दिया गया।
जो आँखें आसमान पढ़ती थीं,
उन्हें ज़मीन पर झुका दिया गया।
हमने देखा है—
मेहनत को हारते हुए,
झूठ को जीतते हुए,
ईमान को बिकते हुए,
और सच को अदालतों में
खामोश खड़े रहते हुए।
हमने देखा है
भूख को रोटी से हारते नहीं,
बल्कि व्यवस्था से हारते हुए।
हमने देखा है
युवाओं की आँखों में
उजाले नहीं,
लंबे इंतज़ार जलते हुए।
लेकिन सुन लो...
हर अँधेरी रात की
एक सुबह होती है।
हर टूटी हुई तलवार की
एक नई धार होती है।
हर घायल आत्मा के भीतर
एक अमर पुकार होती है।
हम वही पुकार हैं।
हम तूफ़ानों से समझौता नहीं करेंगे।
हम हवाओं का रुख़ मोड़ देंगे।
यदि रास्ते बंद किए गए,
तो पत्थरों पर कदमों के निशान छोड़ देंगे।
हमें डराने वालों!
याद रखो—
डर केवल उसी को लगता है
जिसके पास खोने को सब कुछ हो।
जिसने अपने स्वाभिमान को
सबसे बड़ा धन मान लिया,
उसे कोई पराजित नहीं कर सकता।
हमारी चुप्पी को
कमज़ोरी मत समझना।
नदियाँ भी
शोर नहीं करतीं,
लेकिन पहाड़ काट देती हैं।
हमारी आँखों में
क्रोध नहीं,
संकल्प जलता है।
हमारे हाथों में
घृणा नहीं,
परिश्रम पलता है।
हम आग लगाना नहीं चाहते,
हम सूरज उगाना चाहते हैं।
हम किसी का अंत नहीं चाहते,
हम अन्याय का अंत चाहते हैं।
यदि इतिहास बदलना है,
तो पहले स्वयं बदलना होगा।
यदि समाज जगाना है,
तो पहले अपनी आत्मा जगानी होगी।
चलो फिर उठें...
अपनी हार को हथियार बनाएँ।
अपने आँसुओं को संकल्प बनाएँ।
अपने घावों को सम्मान बनाएँ।
अपने संघर्ष को पहचान बनाएँ।
कोई और नहीं आएगा
हमारी तक़दीर बदलने।
हमें ही अपने हाथों से
नया भविष्य गढ़ना होगा।
हम वही पीढ़ी बनेंगे
जो शिकायत नहीं,
समाधान लिखेगी।
जो नफ़रत नहीं,
नई दिशा लिखेगी।
जो डर नहीं,
विश्वास लिखेगी।
और यदि कभी
समय हमसे पूछे—
"तुमने इस युग को क्या दिया?"
तो हमारा उत्तर होगा—
हमने टूटकर भी
हार नहीं मानी।
हमने झुककर भी
स्वाभिमान नहीं छोड़ा।
हमने अँधेरों से लड़कर
उजाले की राह बनाई।
हमारा नाम चाहे कोई याद रखे या नहीं,
लेकिन हमारे संघर्ष की गूँज
आने वाली पीढ़ियों की हिम्मत बनेगी।
अब और नहीं झुकेंगे।
अब और नहीं रुकेंगे।
अब और नहीं डरेंगे।
जब तक साँसों में आग है,
जब तक आँखों में स्वप्न हैं,
जब तक हृदय में मातृभूमि, मानवता और सत्य के लिए प्रेम है—
तब तक
हर अन्याय के सामने
हम अडिग खड़े रहेंगे।
क्योंकि हमारी पहचान
हमारी मंज़िल नहीं,
हमारा संघर्ष है।
और वही संघर्ष
एक दिन
इतिहास बनेगा।
Comments
Post a Comment