नीले आसमान के नाम आख़िरी ख़त...
नीले आसमान के नाम आख़िरी ख़त
नीले आसमान की इस भीगी साँझ में,
मैंने तुम्हारा नाम
बादलों पर लिख तो दिया,
मगर हवाओं ने उसे
अपनी ख़ामोशी में छुपा लिया।
तुम्हारे साथ बिताया हर लम्हा
अब ढलते सूरज की किरण-सा है—
दूर भी,
और मेरी रूह में
अब भी उजाला करता हुआ।
आज जब जुदाई की राह पर
मेरे क़दम आगे बढ़ रहे हैं,
तो पीछे मुड़कर देखता हूँ—
वहाँ तुम नहीं,
सिर्फ़ हमारी यादों का
एक अनंत कारवाँ खड़ा है।
कौन कहता है कि
मोहब्बत सिर्फ़ साथ रहने का नाम है?
कभी-कभी
बिना शिकायत बिछड़ जाना भी
इश्क़ की सबसे मुकम्मल इबादत होती है।
अगर कभी
इस नीले आसमान के नीचे
तुम्हारी पलकों पर
शाम की कोई बूँद ठहर जाए,
तो समझ लेना—
वह बारिश नहीं,
मेरी ख़ामोश दुआ है।
मैं जा रहा हूँ...
मगर तुम्हारे हिस्से की
हर ख़ुशी
रब से माँगकर जा रहा हूँ।
अलविदा,
अगर मुक़द्दर ने चाहा,
तो किसी और शाम,
इसी आसमान के नीचे,
हम अजनबी नहीं,
फिर से एक अधूरी दास्ताँ बनकर मिलेंगे।
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