मेरा घर जल रहा है...
मेरा घर जल रहा है
मेरा घर जल रहा है,
तुम पानी डालो।
कल अगर तुम्हारा घर जले,
मैं भी पानी डालूँगा।
आओ, पहले आग बुझाएँ,
फिर दुनिया की बातें कर लेंगे।
राख पर खड़े होकर
जात-पात के झगड़े नहीं पलेंगे।
जात-पात की चिंता छोड़ो,
न धर्म की दीवार खड़ी करो।
इंसानियत का हाथ थामो,
नफ़रत से अब नाता तोड़ो।
आग कभी नाम नहीं पूछती,
न मज़हब, न कोई पहचान।
लपटों के आगे सब एक हैं,
यही है जीवन का सच्चा ज्ञान।
दर्द की कोई जात नहीं होती,
आँसू का कोई धर्म नहीं।
जो दुख में साथ खड़ा हो जाए,
उससे बड़ा कोई कर्म नहीं।
आज मेरे आँगन में धुआँ है,
कल शायद तुम्हारी बारी हो।
इसलिए आज मेरे साथ चलो,
कल मैं तुम्हारा सहारा होऊँगा।
नफ़रत की चिंगारियाँ बुझाओ,
प्रेम का दीप जलने दो।
हर दिल में मानवता महके,
विश्वास का फूल खिलने दो।
मेरा घर जल रहा है,
तुम पानी डालो।
कल तुम्हारा घर जले अगर,
मैं भी बिना पूछे पानी डालूँगा।
क्योंकि सबसे बड़ा धर्म इंसानियत है,
सबसे बड़ी पूजा परोपकार।
आओ मिलकर ऐसा समाज बनाएँ,
जहाँ प्रेम ही हो सबसे बड़ा त्योहार।
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