अभी क्रांति बाकी है...
अभी क्रांति बाकी है
कह दो हवाओं से—
रुख़ बदलना सीख लें।
कह दो अँधेरों से—
अब सिमटना सीख लें।
क्योंकि जिन आँखों में
सपनों की अग्नि जल उठती है,
उनके सामने सदियों की रातें भी
घुटने टेक देती हैं।
अब हमें रोकना आसान नहीं।
हम गिरेंगे तो उठेंगे,
उठेंगे तो चलेंगे,
चलेंगे तो दौड़ेंगे,
और दौड़ेंगे तो इतिहास की दिशा बदल देंगे।
बहुत देख लिया
वादों का बाज़ार,
झूठ के महल,
सच के जनाज़े,
ईमान की नीलामी,
और मेहनत की बेबसी।
अब हमारी ख़ामोशी
सहमति नहीं,
तैयारी है।
हमारे घाव
हमारी कमज़ोरी नहीं,
युद्ध के पदक हैं।
हमारे आँसू
हमारी हार नहीं,
संघर्ष का अभिषेक हैं।
हम वही लोग हैं
जो राख से उठना जानते हैं।
जो तूफ़ानों से टकराकर भी
दीपक जलाना जानते हैं।
किस्मत ने हर मोड़ पर
हमारी परीक्षा ली।
हर बार गिराया,
हर बार ठुकराया,
हर बार हँसी उड़ाई।
लेकिन उसे क्या पता—
हम मिट्टी के नहीं,
संकल्प के बने हैं।
हमारी साँसों में
परिश्रम का संगीत है।
हमारी धड़कनों में
स्वाभिमान की गर्जना है।
जो हमें कमज़ोर समझते हैं,
वे एक भूल कर रहे हैं।
बीज को देखकर
कौन पहचान पाता है
कि उसके भीतर
पूरा जंगल छिपा है?
हम वही बीज हैं।
एक दिन
हमारी जड़ों से
नई सुबह उगेगी।
हमारी मेहनत से
नया भारत खिलेगा।
हमारे साहस से
नई पीढ़ी मुस्कुराएगी।
चलो उठो!
अपनी मुट्ठियाँ नहीं,
अपने इरादे कसो।
अपनी आवाज़ नहीं,
अपना चरित्र बुलंद करो।
क्रांति तलवार से नहीं,
चरित्र से जन्म लेती है।
राष्ट्र केवल सीमाओं से नहीं,
ईमानदार नागरिकों से महान बनता है।
यदि समय तुम्हें तोड़ने आए,
तो मुस्कुराकर कहना—
"मैं पत्थर नहीं,
बहती हुई नदी हूँ।
रास्ता रोकोगे,
तो नया रास्ता बना लूँगा।"
यदि दुनिया तुम्हें ठुकराए,
तो याद रखना—
सूरज भी हर शाम डूबता है,
लेकिन अगली सुबह
पहले से अधिक प्रकाश लेकर लौटता है।
इसलिए हार से मत डरो।
अस्वीकृति से मत डरो।
अकेलेपन से मत डरो।
डरो केवल उस दिन से
जब तुम्हारे भीतर का योद्धा
लड़ना छोड़ दे।
आज संकल्प लो—
हम झुकेंगे नहीं।
हम बिकेंगे नहीं।
हम थकेंगे नहीं।
हम रुकेंगे नहीं।
जब तक इस धरती पर
अन्याय का एक भी साया है,
जब तक किसी युवा का सपना
मज़ाक बनता है,
जब तक किसी मेहनतकश की आँख
आँसू से भीगती है—
तब तक
हमारी कलम चलेगी,
हमारा कर्म बोलेगा,
हमारा साहस जिएगा।
क्योंकि...
हम मंज़िल के यात्री नहीं,
हम नए युग के निर्माता हैं।
और याद रखना—
क्रांति अभी समाप्त नहीं हुई है...
अभी क्रांति बाकी है।
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