सब खो रहा है रात के अँधेरे में...

सब खो रहा है रात के अँधेरे में


सब खो रहा है रात के अँधेरे में,

मेरा प्यार भी, मेरी साँसों की लौ भी।

खामोशियों ने इस क़दर घेर लिया है मुझे,

कि अब अपनी ही धड़कनों की आहट अजनबी लगती है।


चाँद मेरी तन्हाई का गवाह बनकर ठहर गया है,

और हर सितारा मेरी अधूरी दुआओँ का जनाज़ा उठाए बैठा है।

जिसे उम्र भर अपनी मंज़िल समझता रहा,

वह रास्तों की धूल बनकर हवाओं में बिखर गया।


अब न शिकवा है, न किसी से कोई सवाल,

बस दिल की राख में कुछ बुझती हुई चिंगारियाँ बाकी हैं।

रात हर पल मुझसे मेरा एक हिस्सा छीन लेती है,

और मैं हर सुबह थोड़ा-थोड़ा कम हो जाता हूँ।


अगर यही इश्क़ की आख़िरी मंज़िल है,

तो मैं मुस्कुराकर भी इस हार को स्वीकार कर लूँगा—

क्योंकि कुछ प्रेम कहानियाँ मिलकर नहीं,

बिछड़कर अमर होती हैं।

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