तमाशा नहीं, इतिहास बनना है...

तमाशा नहीं, इतिहास बनना है


मौत की महफ़िल सजा दो,

यदि सत्य की यही कीमत है।

पर याद रहे—

झुककर जीने से बेहतर,

स्वाभिमान की इबादत है।


हमें तमाशा नहीं बनना,

हमें इतिहास बनना है।

इस मिट्टी की हर साँस में,

एक नया विश्वास बनना है।


जब सीमा पर बादल गरजें,

हम वज्र बनकर खड़े रहेंगे।

जब संकट देश को ललकारे,

हम पर्वत बनकर अड़े रहेंगे।


हमने गंगा का जल पिया है,

हिमालय का अभिमान लिया है।

भारत माँ की इस धरती से,

जीने का वरदान लिया है।


न तलवारों का मोह हमें,

न सत्ता का अभिमान चाहिए।

बस इतना सम्मान रहे—

भारत का ऊँचा मान चाहिए।


यदि चलना है, तो आगे चलो,

रास्तों से मत घबराना।

जो राष्ट्र के लिए जी उठे,

उसे कोई नहीं हरा पाना।


दीप बनो उस अँधेरे में,

जहाँ उम्मीदें बुझ जाती हैं।

वृक्ष बनो उस बंजर में,

जहाँ पीढ़ियाँ सूख जाती हैं।


क्रांति का अर्थ विनाश नहीं,

क्रांति जागृत विचार है।

राष्ट्रप्रेम का अर्थ यही—

हर नागरिक से प्यार है।


चलो उठें, संकल्प करें,

भारत को और महान बनाएँ।

जाति, धर्म, भाषा से ऊपर,

मानवता का ध्वज लहराएँ।


यदि नाम लिखाना है जग में,

तो कर्म की पहचान बनो।

क्षणिक तमाशा नहीं,

युगों तक गूँजता हिंदुस्तान बनो।


वतन पुकारे जब भी हमको,

हम मुस्काकर उत्तर देंगे—

"तन, मन, श्रम सब अर्पित हैं,

भारत! तुझ पर जीवन देंगे।"


मौत की महफ़िल सजा दो,

यदि सत्य की यही कीमत है।

पर याद रहे—

झुककर जीने से बेहतर,

स्वाभिमान की इबादत है।


हमें तमाशा नहीं बनना,

हमें इतिहास बनना है।

इस मिट्टी की हर साँस में,

एक नया विश्वास बनना है।


जब सीमा पर बादल गरजें,

हम वज्र बनकर खड़े रहेंगे।

जब संकट देश को ललकारे,

हम पर्वत बनकर अड़े रहेंगे।


हमने गंगा का जल पिया है,

हिमालय का अभिमान लिया है।

भारत माँ की इस धरती से,

जीने का वरदान लिया है।


न तलवारों का मोह हमें,

न सत्ता का अभिमान चाहिए।

बस इतना सम्मान रहे—

भारत का ऊँचा मान चाहिए।


यदि चलना है, तो आगे चलो,

रास्तों से मत घबराना।

जो राष्ट्र के लिए जी उठे,

उसे कोई नहीं हरा पाना।


दीप बनो उस अँधेरे में,

जहाँ उम्मीदें बुझ जाती हैं।

वृक्ष बनो उस बंजर में,

जहाँ पीढ़ियाँ सूख जाती हैं।


क्रांति का अर्थ विनाश नहीं,

क्रांति जागृत विचार है।

राष्ट्रप्रेम का अर्थ यही—

हर नागरिक से प्यार है।


चलो उठें, संकल्प करें,

भारत को और महान बनाएँ।

जाति, धर्म, भाषा से ऊपर,

मानवता का ध्वज लहराएँ।


यदि नाम लिखाना है जग में,

तो कर्म की पहचान बनो।

क्षणिक तमाशा नहीं,

युगों तक गूँजता हिंदुस्तान बनो।


वतन पुकारे जब भी हमको,

हम मुस्काकर उत्तर देंगे—

"तन, मन, श्रम सब अर्पित हैं,

भारत! तुझ पर जीवन देंगे।"

Comments

Popular Posts