रात भी बीत जाएगी…

रात भी बीत जाएगी…


रात भी बीत जाएगी, और वो भी चली जाएगी,

मेरी हथेलियों की हर गर्माहट अपने साथ ले जाएगी।

सुबह तो आएगी, मगर पहले जैसी नहीं होगी,

हर किरण उसकी यादों की परछाईं बन जाएगी।


कुछ रिश्ते सूर्योदय नहीं, बस साँझ तक ही लिखे होते हैं,

वे बिछड़कर भी उम्र भर दिल की किताब में जिए होते हैं।

मैं उसे रोकूँगा नहीं, हवाओं को कैद कौन कर पाया है,

सच्चा प्रेम तो उड़ते परिंदों को भी दुआ देकर विदा करता है।


वक़्त मेरी आँखों का समंदर भी एक दिन शांत कर देगा,

पर उसके नाम का ज्वार कभी पूरी तरह नहीं उतरेगा।

रात का अँधेरा हार जाएगा, सुबह फिर मुस्कुराएगी,

मगर मेरे हिस्से की एक ख़ामोशी हमेशा उसके साथ चली जाएगी।

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