अब सिंहनाद होगा...

अब सिंहनाद होगा


अब बहुत हुआ मौन हमारा,

अब सिंहनाद होगा।

जो सत्य से आँख मिलाएगा,

वही आज़ाद होगा।


हमने सदियों का बोझ उठाया,

अपमानों का विष भी पिया।

लेकिन स्वाभिमान की अग्नि को

कभी नहीं बुझने दिया।


मत परखो हमें

हमारी ख़ामोशी से।

ज्वालामुखी भी

फटने से पहले

शांत दिखाई देता है।


हम आँधी नहीं—

दिशा बदलने वाली चेतना हैं।

हम क्रोध नहीं—

अन्याय के विरुद्ध जागी हुई आत्मा हैं।


लोहे की ज़ंजीरों से

विचार नहीं बँधते।

ऊँची दीवारों से

सूरज नहीं रुकते।


यदि रास्ते रोक दोगे,

हम पर्वत चीर देंगे।

यदि आवाज़ दबाओगे,

हम इतिहास में गूँजेंगे।


हमारे कदमों की धूल

कल की राह बनेगी।

हमारे संघर्ष की लौ

हर दिल में आग जगेगी।


हम बिकेंगे नहीं।

हम झुकेंगे नहीं।

हम डरेंगे नहीं।


क्योंकि जिसने

अपने आत्मसम्मान को

जीवन से बड़ा मान लिया,

उसे कोई शक्ति

पराजित नहीं कर सकती।


उठो!


अपनी आँखों में

विद्रोह नहीं,

विवेक जगाओ।


अपने हाथों में

घृणा नहीं,

परिश्रम उठाओ।


अपने शब्दों में

ज़हर नहीं,

सत्य की बिजली भरो।


आज प्रतिज्ञा करो—


अन्याय के सामने

मौन नहीं रहेंगे।


झूठ के सामने

झुकेंगे नहीं।


भय के सामने

रुकेंगे नहीं।


जब तक इस मिट्टी पर

एक भी अन्याय बाकी है,

जब तक एक भी सपना

अपमानित है,


तब तक—


हमारी कलम तलवार से तेज़ होगी,

हमारा चरित्र किले से मज़बूत होगा,

और हमारा संकल्प

हर तूफ़ान से ऊँचा होगा।


याद रखना—


साम्राज्य शक्ति से बनते हैं,

लेकिन बदलते

जागे हुए लोगों के संकल्प से हैं।


आज से...


हम भीड़ नहीं,

चेतना हैं।


हम आवाज़ नहीं,

युग-परिवर्तन की गूँज हैं।


और जब इतिहास अगला पन्ना खोलेगा,


तो उस पर लिखा होगा—


"वे झुके नहीं।

वे बिके नहीं।

वे डरे नहीं।

वे जागे... और उनके साथ एक युग जाग उठा।"

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