दर्द का सिलसिला है ऐसा...

 By Rupesh Ranjan.... 


दर्द का सिलसिला है ऐसा,

आँसू गिरते हैं, थकते नहीं।

बारिश में कितना भी नहा लूँ,

ये आँसू फिर भी छिपते नहीं।

बेहतर है कि बारिश यूँ ही बरसती रहे,
थमे नहीं, रात भर चलती रहे।
क्योंकि बारिश जब रुक जाती है,
तेरी याद फिर चली आती है।

बूँदों के शोर में दब जाता है दर्द,
बादलों में खो जाती हैं आहें।
भीगता रहता हूँ मैं चुपचाप,
और भीगती रहती हैं मेरी निगाहें।

यूँ ही चलता रहे मौसम का खेल,
बादल आते रहें, बारिश होती रहे।
कुछ देर के लिए ही सही,
ज़िंदगी अपनी उदासी से सोती रहे।

क्योंकि बारिश रुकती है तो
खामोशी बोलने लगती है,
और खामोशी के उस पार
तेरी याद खड़ी मिलती है।

इसलिए ऐ बारिश,
तू रुकना मत कभी—
तेरे साथ बहते हुए आँसू
कम-से-कम मुझसे सवाल तो नहीं करते।

दर्द का सिलसिला है ऐसा,
कि आँसू गिरते-गिरते थकते नहीं।
और जब तक तू बरसती रहेगी,
शायद हम भी टूटकर बिखरेंगे नहीं।

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