Some beautiful shayaris.....
लिखना है तो इक़बाल-ए-हिंद के लिए लिखो,
लिखना है तो इंक़लाब-ए-हिंद के लिए लिखो।
हर ख़ामोश लब की आवाज़ बनकर लिखो,
हर टूटे हुए दिल का आग़ाज़ बनकर लिखो।
जो सोई हुई उम्मीद है, उसे जगा दो कलम से,
जो दीवारें हैं नफ़रत की, उन्हें मिटा दो कलम से।
स्याही नहीं—अपने ज़मीर की आग से लिखो,
लिखना है तो हिंद के नए इंक़लाब के लिए लिखो।
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बादल रोए,
धरती मुस्कुराए,
बूँद-बूँद जब आँचल में आए,
सूखी मिट्टी फिर महक उठे,
जैसे कोई भूली हुई याद
अचानक लौट आए।
फिर क्यों न बादल
बार-बार रोए...
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उन्हें दर्ज़ा और मकाँ चाहिए
हमें तो बस प्यार चाहिए
उनसे पूछो
जिनके पास है तड़प बेशुमार
और एक इंसान भी नहीं
जो करता हो उनसे प्यार...
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आपने समझा ही नहीं जाहिलियत इस दुनिया की
पर्दों से प्यार है
हसीनों से नहीं..
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मज़लूम हूँ उसकी चाहत में
पाना है उसे..
डराके नहीं...
______(+(((((+++--_₹@#_+()))
मज़लूम हूँ तो पूजता हूँ
ताक़तवर कहाँ आते हैं मंदिर...
_&&__+++(((+(((++++__--+-±-&_
तू पढ़ मोमिन
सफ़र लंबा है
कटता नहीं है सफ़र जाहिलियत में....
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मैं ज़र्रा-ज़र्रा जलता हूँ उसकी तड़प में
मुझे मरना है अपने ज़हर से...
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खुद को तराश ऐ फ़ाज़िल
सुकून नहीं मिलता दूसरे के फ़न को देखकर
मैं ज़र्रा-ज़र्रा जलता हूँ उसकी तड़प में
मुझे मरना है अपने ज़हर से...
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खुद को तराश ऐ फ़ाज़िल
सुकून नहीं मिलता दूसरे के फ़न को देखकर...
Rupesh Ranjan
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