पिया, तोरा काहे का अभिमान...
पिया, तोरा काहे का अभिमान
पिया, तोरा काहे का अभिमान,
प्रेम बरसे,
मन भीग जाए,
बिन प्रेम के कौन मुस्काए।
तोहार प्रेम कितना छोटा,
सोच ज़रा,
इस जग का प्रेम तेरे लिए कितना ज़्यादा।
एक बूँद तू दे दे साजन,
सागर हो जाए,
सूना-सूना मन का आँगन
फूलों से भर जाए।
तोहार हँसी चाँदनी जैसी,
रात सँवार दे,
तोहार बोली सूखी डाली पर
नव पत्ता उगा दे।
तू रूठे तो सावन रूठे,
बादल लौट जाएँ,
तू हँस दे तो सूनी गलियाँ
दीपक बन मुस्काएँ।
तोरा बिना ये दुनिया कैसी,
जैसे बिन धुन गान,
पिया, तोरा काहे का अभिमान।
प्रेम न माँगे राजमहल,
न माँगे सम्मान,
बस दो पल तू पास बैठ जा,
यही बड़ा वरदान।
तू अपना कह दे इक पल को,
जीवन धन्य हो जाए,
तेरे नाम की एक पुकार से
मन मंदिर बन जाए।
तोहार प्रेम अगर मिल जाए,
क्या माँगूँ भगवान,
पिया, तोरा काहे का अभिमान।
प्रेम बरसे,
सब नहाएँ,
बिन प्रेम के सब रिश्ते
रेत बने रह जाएँ।
तोहार प्रेम चाहे थोड़ा हो,
दिल उसको संसार बनाए,
और जग का सारा प्रेम भी
तेरे आगे कम पड़ जाए।
पिया, बस इतना याद रखिहऽ—
प्रेम नहीं अभिमान,
तू मेरा छोटा-सा हिस्सा,
पर तू ही मेरा जहान।
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