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संध्या की वह मुलाक़ात

अधूरी बाँहें

मुस्कानों का उजाला

सिर्फ उजाला

रेखाओं के पार

इंतज़ार

अंतिम आलिंगन

किसी स्थान से कम नहीं होते

तुम आना दशकों बाद मुझसे मिलने...

जाना वहीं तक है...

मैं खुश हूँ तेरे साथ

सुकून छीन लिया है मेरी रातों का

तुम मिलते हो मुझसे

रात भर जागता रहा मैं

वर्षों बाद भी

मिलन का क्षण

अविचल प्रेम

हवा बन जाने की इच्छा

क्या भारत ने अपने साबित मित्र रूस और ईरान को खो दिया है? मिथक, वास्तविकता और बदलती वैश्विक राजनीति

India Lost Its Proved Friends Russia and Iran: Myth, Reality, and Geopolitical Shifts