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When Alliances Take Away Voter Choices: The Voter’s Dilemma in Bihar

गंगा बहती है, गंडक बहती है..

मैं ग़रीब हूँ, बहुत ग़रीब हूँ।

कैसे माफ़ करूँ शबरी को...

कैसे माफ़ करूँ कैकेयी को...

मैं सुबह साढ़े चार बजे उठता था...

मुझे कविताओं में पिघला दो, बहते हुए शब्दों में...

मुझे सबसे अधिक कठिनाई इसी बात से है

“माँ आई हैं दस दिनों के लिए।”

मैंने बुलाया उसे...

मुझे कविताओं में पिघला दो....

किस-किस को याद करूँ...

When News Turns Negative: Early Bias and Unbalanced Criticism in Indian Media

India Doesn’t Need America Seriously...

ख़ुद से जंग...