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कैसे भूल जाते हैं लोग किसी को याद रख के...

मैं क्यों न मानूं कि मैं उसके लिए भगवान हूं...

कविता: कवि के लिए ज़िंदगी है...

मैं कर ही क्या सकता हूँ...

तुम्हारे लिए आसान है...

तुम अपरिपक्व हो...

मैं भी चला जाऊंगा...

मेरी आख़िरी कविता (2)...

मैं नहीं जानता....

मैं नहीं जानता... (2)

मेरी आख़िरी कविता ...

मत कर प्यार मुझसे... (2)

मत कर प्यार मुझसे...

आज की सुबह उनके बिना....

आज की सुबह बड़े पापा के बिना...