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“घर नहीं आओगी, बेटी…

“घर नहीं आओगी, बेटी?”

“सही चुनाव”

“इंतज़ार की धड़कन”...

तेरी यादों की चादर ओढ़े जी रहा हूँ मैं...

मेरा अंग-अंग तड़पता है तेरी याद में...

तेरी यादों में हर पल जलता हूँ मैं...

तेरी चाहत का अंदाज़ क्या लिखूँ...

तू मेरी रूह में ऐसे बसी है जैसे सांसों में जान...

तू मेरी ज़िंदगी की बहार है...

तू मेरे लिए एक फूल है...

तेरे बिना अब साँस लेना भी अधूरा सा लगता है...

तेरे होने से ही मेरी दुनिया मुकम्मल लगती है...

तेरे नाम की रौशनी से ही उजाला है मेरा...

When a Political Bastion Falls: Understanding the Shift in West Bengal and Beyond