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मेरे पास कलम और पन्ने हैं।

इसलिए चाय पी रहा था...

मत करो मुझसे प्यार...

शाम हो चुकी है...

मेरी आँखों ने अंतर करना सीख लिया है...

उस संबंध को छोड़ ही देना चाहिए,

प्रकृति को कष्ट पहुँचाने जैसा है...

इंसान का अहंकार।

समुद्र बनना मुश्किल है...

तुम्हें संबंध क्यों चाहिए?

मेरी लिखी कोई भी कविता मेरे लिए नहीं है

कल शाम मैंने उसे देखा था...

Fooled...

Betrayal...

आत्मा का चुम्बन...